E-Shram card – हमारे देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ असंगठित क्षेत्र के वे करोड़ों मजदूर हैं जो दिन-रात मेहनत करके अपना और अपने परिवार का पेट पालते हैं। लेकिन जब उम्र का पड़ाव बढ़ता है और शारीरिक क्षमता कम होने लगती है, तब इन मेहनतकश लोगों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो जाता है। बुढ़ापे में काम करने की ताकत खत्म हो जाती है और आमदनी का कोई जरिया नहीं रहता। ऐसे में जीवन बहुत कठिन हो जाता है और परिवार पर निर्भरता बढ़ जाती है।
इन्हीं समस्याओं को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए एक विशेष पेंशन योजना शुरू की है। यह योजना उन लाखों मजदूरों के लिए आशा की किरण लेकर आई है जो अपने भविष्य को लेकर चिंतित रहते थे। ई-श्रम कार्ड धारकों के लिए बनाई गई इस पेंशन योजना के माध्यम से सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि देश का हर मजदूर सम्मान के साथ अपना बुढ़ापा बिता सके। यह योजना न केवल आर्थिक सहायता प्रदान करती है बल्कि मजदूर वर्ग को सामाजिक सुरक्षा का भी एहसास दिलाती है।
योजना का मूल उद्देश्य और महत्व
इस पेंशन योजना को शुरू करने के पीछे सरकार का मुख्य लक्ष्य असंगठित क्षेत्र में कार्यरत श्रमिकों को वृद्धावस्था में वित्तीय स्थिरता प्रदान करना है। देश में करोड़ों ऐसे मजदूर हैं जो दिहाड़ी मजदूरी, छोटे-मोटे काम या अस्थायी रोजगार पर निर्भर हैं। इनके पास कोई निश्चित आय का स्रोत नहीं होता और न ही किसी तरह की सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिलता है। जब ये लोग बूढ़े हो जाते हैं तो उनके पास न तो बचत होती है और न ही कमाने का कोई माध्यम।
सरकार का मानना है कि जिन लोगों ने अपना पूरा जीवन देश के विकास में लगा दिया, उन्हें बुढ़ापे में किसी के सामने हाथ नहीं फैलाना चाहिए। इस योजना के जरिए मजदूर वर्ग को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाया जा सकता है। यह पहल समाज के उस वर्ग के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जो हमेशा से उपेक्षित रहा है। योजना का उद्देश्य केवल पैसा देना नहीं बल्कि मजदूरों को सम्मानपूर्वक जीने का अधिकार देना है।
पेंशन योजना से मिलने वाले फायदे
इस कल्याणकारी योजना के अंतर्गत जब किसी पंजीकृत श्रमिक की आयु साठ वर्ष पूरी हो जाती है, तो उसे प्रतिमाह तीन हजार रुपये की पेंशन राशि दी जाती है। यह पेंशन आजीवन मिलती रहती है और इससे बुजुर्ग व्यक्ति अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा कर सकता है। तीन हजार रुपये की यह राशि भले ही बड़ी न लगे, लेकिन एक असंगठित क्षेत्र के मजदूर के लिए यह बहुत मायने रखती है।
योजना की एक और खास बात यह है कि अगर पेंशन पाने वाले व्यक्ति की दुर्भाग्यवश मृत्यु हो जाती है तो उसके जीवनसाथी को पेंशन की आधी राशि यानी पंद्रह सौ रुपये प्रतिमाह मिलते रहते हैं। यह प्रावधान परिवार को पूरी तरह से असहाय होने से बचाता है और विधवा या विधुर को भी आर्थिक सहारा देता है। इस तरह यह योजना केवल एक व्यक्ति को नहीं बल्कि पूरे परिवार को सुरक्षा कवच प्रदान करती है।
योजना में शामिल होने की शर्तें
इस योजना का लाभ उठाने के लिए कुछ निर्धारित मानदंड तय किए गए हैं जिन्हें पूरा करना आवश्यक है। सबसे पहली शर्त यह है कि आवेदक भारत का मूल निवासी होना चाहिए। यह योजना विशेष रूप से असंगठित क्षेत्र के कामगारों के लिए बनाई गई है जिनमें रिक्शा चालक, निर्माण मजदूर, दर्जी, मोची, नाई, धोबी, सफाई कर्मचारी, कृषि मजदूर और इसी तरह के अन्य पेशे वाले लोग शामिल हैं।
आवेदक की उम्र अठारह से चालीस वर्ष के बीच होनी चाहिए ताकि वे योजना में समय रहते शामिल हो सकें। मासिक आय की सीमा पंद्रह हजार रुपये निर्धारित की गई है यानी जिनकी कमाई इससे ज्यादा है वे इस योजना के पात्र नहीं हैं। आवेदक को आयकर दाता नहीं होना चाहिए और न ही उसे कर्मचारी भविष्य निधि संगठन या कर्मचारी राज्य बीमा निगम का सदस्य होना चाहिए। परिवार में किसी का भी सरकारी नौकरी में होना योजना के लिए अयोग्यता का कारण बन सकता है।
आवश्यक कागजात और दस्तावेज
योजना में पंजीकरण के लिए कुछ जरूरी दस्तावेजों की आवश्यकता होती है। सबसे महत्वपूर्ण आधार कार्ड है जो पहचान का प्रमाण है। निवास प्रमाण पत्र से यह साबित होता है कि आवेदक भारत का स्थायी निवासी है। बैंक की पासबुक इसलिए जरूरी है क्योंकि पेंशन की राशि सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर होती है। ई-श्रम कार्ड का होना अनिवार्य है क्योंकि यह योजना उन्हीं लोगों के लिए है जो ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत हैं।
इसके अलावा जन्म प्रमाण पत्र या कोई भी ऐसा दस्तावेज जो उम्र साबित करता हो, वह भी चाहिए। हाल ही में खींची गई पासपोर्ट साइज फोटो और सक्रिय मोबाइल नंबर भी देना होगा क्योंकि सभी सूचनाएं और अपडेट मोबाइल पर ही आते हैं। ये सभी दस्तावेज मिलकर आवेदन प्रक्रिया को आसान और पारदर्शी बनाते हैं।
पंजीकरण की सरल प्रक्रिया
इस पेंशन योजना के लिए आवेदन करने की प्रक्रिया काफी सरल और सुविधाजनक बनाई गई है। सबसे पहले आवेदक को माननधन की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा। वेबसाइट के होम पेज पर मानधन में पंजीकरण का विकल्प दिखाई देगा जिस पर क्लिक करना होगा। इसके बाद एक फॉर्म खुलेगा जिसमें व्यक्तिगत जानकारी जैसे नाम, जन्मतिथि, मोबाइल नंबर और आधार नंबर भरना होगा।
सभी आवश्यक विवरण भरने के बाद मांगे गए दस्तावेजों को स्कैन करके अपलोड करना होगा। जब सारी जानकारी सही तरीके से भर जाए तो सिस्टम आवेदक की उम्र के अनुसार प्रीमियम राशि की गणना करेगा। यह प्रीमियम हर महीने जमा करना होता है। जितनी कम उम्र में योजना में शामिल होंगे उतना कम प्रीमियम देना पड़ेगा। प्रीमियम राशि का भुगतान ऑनलाइन किया जा सकता है। भुगतान पूरा होने के बाद पंजीकरण की रसीद मिल जाएगी जिसे संभालकर रखना चाहिए।
नियमित योगदान का महत्व
योजना में पंजीकरण के बाद सबसे जरूरी है नियमित रूप से मासिक प्रीमियम जमा करते रहना। यह प्रीमियम आपकी उम्र के आधार पर निर्धारित होता है और हर महीने समय पर जमा करना आवश्यक है। अगर नियमित रूप से योगदान नहीं दिया गया तो साठ वर्ष की आयु पूरी होने पर पेंशन का लाभ नहीं मिल पाएगा। इसलिए हर महीने तय तारीख पर प्रीमियम जमा करना बहुत जरूरी है।
यह प्रीमियम राशि वास्तव में आपके भविष्य की बचत है जो बाद में पेंशन के रूप में मिलती है। जो लोग अभी थोड़ा-थोड़ा योगदान देंगे, वे बुढ़ापे में हर महीने नियमित आय पा सकेंगे। यह एक तरह से जीवन बीमा की तरह काम करता है जो वृद्धावस्था में आर्थिक सुरक्षा प्रदान करता है।
समाज में बदलाव की दिशा
यह पेंशन योजना केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं बल्कि समाज में बदलाव लाने का एक सशक्त माध्यम है। जब मजदूर वर्ग को यह एहसास होगा कि सरकार उनकी चिंता करती है और उनके भविष्य की सुरक्षा के लिए प्रयासरत है, तो उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा। यह योजना उन्हें गरिमा के साथ जीने का अवसर देती है और बुढ़ापे को बोझ नहीं बल्कि सम्मान का दौर बनाती है। असंगठित क्षेत्र के करोड़ों मजदूर इस योजना का लाभ उठाकर अपना और अपने परिवार का भविष्य सुरक्षित कर सकते हैं।





